Delhi High CourtFile Photo

Novo Nordisk बनाम Sun Pharma: फार्मा क्षेत्र में पेटेंट विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। डेनिश फार्मा दिग्गज नोवो नॉर्डिस्क (Novo Nordisk) ने भारतीय कंपनी सन फार्मास्युटिकल (Sun Pharmaceutical) को ब्लॉकबस्टर दवा ओज़ेम्पिक (Ozempic) के सक्रिय फार्मास्युटिकल घटक (API) सेमाग्लूटाइड (Semaglutide), या इससे व्युत्पन्न किसी भी उत्पाद के निर्माण या बिक्री से रोकने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है।

यह नया कानूनी दाँव नोवो नॉर्डिस्क द्वारा भारत में अपने महत्वपूर्ण पेटेंट अधिकारों की रक्षा करने के प्रयासों को दर्शाता है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब भारतीय कंपनियां सेमाग्लूटाइड के जेनेरिक संस्करणों को बाजार में लाने की तैयारी कर रही हैं।

DRL के मामले की पृष्ठभूमि

नोवो नॉर्डिस्क का सन फार्मा के खिलाफ यह ताजा कदम, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (DRL) के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया फैसले के तुरंत बाद आया है।

  • DRL को मिली अनुमति: पिछले हफ्ते, हाई कोर्ट की एकल पीठ ने DRL को सेमाग्लूटाइड युक्त अपनी जेनेरिक दवा का विनिर्माण और निर्यात जारी रखने की अनुमति दे दी थी।

  • कोर्ट का प्राथमिक निष्कर्ष: कोर्ट ने नोवो नॉर्डिस्क के पक्ष में कोई अंतरिम निषेधाज्ञा (interim injunction) देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया (prima facie) यह निष्कर्ष निकाला था कि DRL ने सेमाग्लूटाइड पर नोवो नॉर्डिस्क के पेटेंट की वैधता को एक विश्वसनीय चुनौती दी है। नोवो नॉर्डिस्क के पास इस दवा का भारतीय पेटेंट मार्च 2026 तक है।

  • भारत में बिक्री पर रोक: हालांकि, कोर्ट ने DRL को दवा के विनिर्माण और निर्यात की अनुमति दी, लेकिन नोवो नॉर्डिस्क का पेटेंट समाप्त होने तक DRL को इसे भारत में बेचने से रोक दिया।

सेमाग्लूटाइड और पेटेंट विवाद का महत्व

सेमाग्लूटाइड एक जीएलपी-1 (GLP-1) एगोनिस्ट दवा है, जिसे नोवो नॉर्डिस्क वैश्विक स्तर पर ओज़ेम्पिक (Ozempic) ब्रांड नाम से टाइप 2 मधुमेह के इलाज के लिए और वज़न घटाने के लिए भी विपणन करती है।

यह दवा अपने ब्लॉकबस्टर दर्जे के कारण फार्मा उद्योग के केंद्र में है। भारत में पेटेंट विवाद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न केवल नोवो नॉर्डिस्क के राजस्व को प्रभावित करता है, बल्कि भारतीय कंपनियों के लिए एक अत्यधिक मांग वाली दवा का सस्ता जेनेरिक संस्करण बाजार में लाने का रास्ता भी खोलता है। नोवो नॉर्डिस्क अब सन फार्मा पर मुकदमा करके यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई अन्य प्रमुख भारतीय खिलाड़ी भी पेटेंट अवधि समाप्त होने से पहले भारतीय बाजार में अपनी दवा न लाए।

हाई कोर्ट अब सन फार्मा के खिलाफ नोवो नॉर्डिस्क की याचिका पर विचार करेगा, जिससे यह निर्धारित होगा कि DRL के मामले में दिए गए तर्क अन्य भारतीय फार्मा कंपनियों पर भी लागू होते हैं या नहीं।

By Bhaskar

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