Uttarakhand UCC Implementation One YearCM DHAMI

Uttarakhand UCC Implementation One Year

देहरादून |

देवभूमि उत्तराखंड ने 27 जनवरी 2025 को देश के संवैधानिक और सामाजिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा था। इसी दिन उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जहाँ समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को विधिवत रूप से लागू किया गया। उस समय यह फैसला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी एक बड़ा और साहसिक कदम माना गया था।

आज, जब इस कानून के क्रियान्वयन को एक वर्ष पूरा होने जा रहा है, तब इसके प्रभाव और स्वीकार्यता को आंकड़ों के जरिए परखा जा सकता है। शुरुआती आशंकाओं और विरोध के बावजूद, जनता ने UCC को न केवल स्वीकार किया बल्कि इसे अपनी दिनचर्या और कानूनी जीवन का हिस्सा बनाना शुरू कर दिया है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण है—करीब 5 लाख (4,98,688) पंजीकरण आवेदन।


देश का ‘रोल मॉडल’ बना उत्तराखंड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लागू हुई समान नागरिक संहिता को लेकर शुरुआत में राजनीतिक बयानबाजी, सामाजिक बहस और खासकर ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ के प्रावधानों पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं। लेकिन एक साल के भीतर ही तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।

गृह विभाग से प्राप्त ताजा आंकड़े बताते हैं कि UCC अब किसी थोपे गए कानून की तरह नहीं, बल्कि स्वैच्छिक सहभागिता के साथ आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार के अनुसार, यह कानून अब प्रशासनिक प्रयोग नहीं बल्कि सामाजिक व्यवहार का हिस्सा बनता जा रहा है।


पंजीकरण की वर्तमान स्थिति: आंकड़ों की जुबानी सफलता

Uttarakhand UCC Implementation One Year की समीक्षा करें तो सामने आता है कि कुल 4,98,688 आवेदनों में से—

  • 4,75,639 आवेदन स्वीकृत (Approved) किए जा चुके हैं
  • 19,120 आवेदन रिजेक्ट (Rejected) हुए, जिनमें मुख्य कारण अधूरे दस्तावेज़ या तकनीकी त्रुटियां रहीं
  • 2,615 आवेदन अभी पेंडिंग (Pending) हैं

यानी लगभग 95 प्रतिशत मामलों में प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है, जो किसी भी नए डिजिटल कानून के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।


विवाह पंजीकरण में ऐतिहासिक उछाल

UCC के तहत सबसे अधिक रुझान विवाह पंजीकरण (Marriage Registration) में देखा गया है। आंकड़ों के अनुसार—

  • कुल 4,08,244 आवेदन विवाह पंजीकरण के लिए प्राप्त हुए
  • इनमें से 3,89,125 जोड़ों को विवाह प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव दर्शाता है कि अब लोग केवल सामाजिक या धार्मिक रस्मों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि कानूनी सुरक्षा और अधिकारों को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। यह प्रवृत्ति खासकर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अधिक स्पष्ट दिखाई देती है।


जिलेवार रिपोर्ट: हरिद्वार शीर्ष पर, देहरादून दूसरे स्थान पर

UCC के प्रति जागरूकता और सहभागिता के मामले में हरिद्वार जिला सबसे आगे रहा है, जबकि राजधानी देहरादून दूसरे स्थान पर है।

जिलेवार स्थिति (संक्षेप में):

  • हरिद्वार: 96,421 आवेदन (92,140 स्वीकृत)
  • देहरादून: 61,446 आवेदन (58,160 स्वीकृत)
  • उधम सिंह नगर: 49,419 आवेदन
  • नैनीताल: 44,889 आवेदन
  • पौड़ी गढ़वाल: 44,964 आवेदन

इसके अलावा टिहरी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत, चमोली जैसे पर्वतीय जिलों में भी संतोषजनक संख्या में पंजीकरण दर्ज किए गए हैं, जो यह साबित करता है कि UCC का प्रभाव केवल मैदानी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है।


तकनीकी चुनौतियां: सफलता के बीच सिस्टम पर दबाव

जहाँ एक ओर Uttarakhand UCC Implementation One Year को प्रशासनिक सफलता माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर तकनीकी ढांचे की सीमाएं भी सामने आई हैं।

आम समस्याएं:

  • अत्यधिक ट्रैफिक के कारण सर्वर डाउन की शिकायतें
  • OTP देरी से पंजीकरण प्रक्रिया बाधित
  • अधिकारियों के स्तर पर भी आवेदन निपटान में देरी

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले वर्षों में यही रफ्तार बनी रही, तो सरकार को क्लाउड-बेस्ड और हाई-कैपेसिटी सर्वर सिस्टम पर निवेश करना होगा।


लिव-इन रिलेशनशिप: विरोध से व्यवहारिक स्वीकार्यता तक

UCC लागू होने के समय सबसे ज्यादा विवाद लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य पंजीकरण को लेकर हुआ था। निजता के हनन से लेकर सामाजिक हस्तक्षेप तक कई सवाल उठे। लेकिन समय के साथ यह नजरिया बदला है।

गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार, अब युवा वर्ग इसे कानूनी सुरक्षा और पारदर्शिता के रूप में देख रहा है। लिव-इन पंजीकरण के मामलों में धीरे-धीरे लेकिन स्थिर वृद्धि दर्ज की जा रही है।


निष्कर्ष: उत्तराखंड का साहस, देश के लिए दिशा

एक साल का अनुभव यह साबित करता है कि Uttarakhand UCC Implementation One Year केवल एक कानूनी प्रयोग नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में उठाया गया ठोस कदम है। उत्तराखंड अब अन्य राज्यों के लिए एक ‘रोल मॉडल’ और केस स्टडी बन चुका है।

हालांकि, तकनीकी ढांचे को मजबूत करना सरकार की अगली बड़ी जिम्मेदारी होगी, ताकि यह डिजिटल व्यवस्था आम नागरिक के लिए और अधिक सरल व भरोसेमंद बन सके।

राज्य के नागरिक UCC के तहत पंजीकरण के लिए आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। आने वाले समय में यह कानून न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश की नीति बहस को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

By Bhaskar

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